लो आज फिर बारिश होने लगी
जब भी तुम दूर जाते ह़ो
बारिश होने लगती है
माना की मन उदास है
तन्हाई है
तकलीफ भी है
पर ये भी कोई बात है भला
तुम्हारी ग़ैर-हाज़री में
ये बादल
सेंध लगा कर
बस चले आते हैं
ये भी नहीं समझते की
ठण्ड में रुखसार पे
नमकीन पानी
बहुत जलन करता है
दुष्ट बादल....huhh
8 comments:
सही मे दुष्ट हैं।
इस बरसात पर अपना कोई जोर जो नहीं चलता...
सुंदर अभिव्यक्ति..
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......
:):) मैंने तो सुना है बारिश बड़ी रोमांटिक होती है ।
:):) मैंने तो सुना है बारिश बड़ी रोमांटिक होती है ।
प्रभावी अभिव्यक्ति
sundar bhavabhivykti...
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