Monday, February 13, 2012

दुष्ट बादल....huhh


लो आज फिर बारिश होने लगी
जब भी तुम दूर जाते ह़ो
बारिश होने लगती है
माना की मन उदास है
तन्हाई है
तकलीफ भी है
पर ये भी कोई बात है भला
तुम्हारी ग़ैर-हाज़री में
ये बादल
सेंध लगा कर
बस चले आते हैं
ये भी नहीं समझते की
ठण्ड में रुखसार पे
नमकीन पानी
बहुत जलन करता है
दुष्ट बादल....huhh

8 comments:

वन्दना said...

सही मे दुष्ट हैं।

vidya said...

इस बरसात पर अपना कोई जोर जो नहीं चलता...

sushma 'आहुति' said...

सुंदर अभिव्यक्ति..

Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):) मैंने तो सुना है बारिश बड़ी रोमांटिक होती है ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):) मैंने तो सुना है बारिश बड़ी रोमांटिक होती है ।

Amrita Tanmay said...

प्रभावी अभिव्यक्ति

Reena Maurya said...

sundar bhavabhivykti...